भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण (एसएलयूएसआई), कृ्षि एवं सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय के अधीनस्थ प्रमुख कार्यालय है।  इसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान परिसर , नई दिल्ली में इसके मुख्यालय के साथ वर्ष 1958 में स्थापित किया गया था। एसएलयूएसआई के 07 क्षेत्रीय केंद्र हैं, जो नोयडा, कोलकाता, बंगलुरु, नागपुर, हैदराबाद, अहमदाबाद और रांची में स्थित हैं। एसएलयूएसआई ने मृदा सर्वेक्षण में उन्नत प्रोद्यौगिकी के अनुप्रयोग के लिए 1982 में सुदूर संवेदन केंन्द्र की स्थापना भी की है।  

भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण का प्रमुख अधिदेश प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा मृदा एवं जल संरक्षण से संबंधित कार्यक्रमो के नियोजन एवं कार्यान्वयन के लिए विभिन्न राज्यों तथा प्रयोक्ता विभागों को मृदा तथा भूमि की विशेषताओं से संबंधित वैज्ञानिक आंकड़ा आधार उपलब्ध कराना है। भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण  के मुख्य कार्यकलाप  हैं- 1. तीव्र प्रारंभिक सर्वेक्षण, 2, विस्तृत मृदा सर्वेक्षण, 3. भूमि क्षरण मैपिंग, 4. मृदा संसाधन प्रबंधन, 5. भारत के डिजिटल वाटरशेड एटलस का निर्माण, 6. राष्ट्रीय डाटाबेस, 7. राज्यों के उपयोगकर्ता विभागों के अधिकारियो के लिए भूमि संसाधन इन्वेँटरी और एकीकृत वाटरशे़ड प्रबंध पर साल में संक्षिप्त कोर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन करना है।

 

भारत का  डिजिटल वाटरशेड एटलस  का  विमोचन
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 श्री पी. के. बसु, आई. ए. एस. सचिव, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार ने दिनांक 30-05-2012 को भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण द्वारा प्रकाशित डिजिटल वाटरशेड एटलस आफ इंडिया का विमोचन कृषि भवन, नई दिल्ली में किया। इस अवसर पर श्री ई. के. माझी, आई.ए.एस, संयुक्त सचिव (एन.आर.एम.), श्री सुब्रतो नाथ, निदेशक (एन.आर.एम.) तथा डा. तपन कुमार देब, मुख्य मृदा सर्वेक्षण अधिकारी (प्रभारी) भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण उपस्थित थे।


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 सर्वेक्षण रिपोर्ट
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भारत का सूक्ष्म वाटरशेड एटलस जीआईएस आधारित वेब सेवाओं

भारत की सूक्ष्म वाटरशेड एटलस का उद्देश्य देश में माइक्रो वाटरशेड की अलग पहचान एवं सीमांन करने के साथ अद्वितीय राष्ट्रीय कोड प्रदान करना है । भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण के द्वारा उपलब्ध स्थानीय आंकडों के आधार पर राज्यवार एटलस के प्रकाशन पर विचार कर रहा है।  भारत की म्राइको वाटरशेड एटलस को इस तरह बनाया गया है कि उपभोक्ता विभिन्न राज्यों के जिलों में अपना वांछित सूक्ष्म वाटरशेड पहचान करने और खोजने में सक्षम हो जाएगा।

        SOIL AND LAND USE INFROMATION SYSTEM



                   
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